परिसीमन में ‘घुमन्हेड़ा’ और ‘छावला’ वार्डों की बदल सकती है सूरत

परिसीमन में घुमन्हेड़ा और छावला वार्डों की बदल सकती है सूरत

परिसीमन में घुमन्हेड़ा और छावला वार्डों की बदल सकती है सूरत

कई नेताओं के लिए बदल सकती है चुनावी बिसात

नई दिल्ली , दिस 7 (दिल्ली क्राउन): आजकल राजनीतिक गलियारों में चर्चा आम है कि दिल्ली में आगामी नगर निगम (MCD) चुनावों से पहले होने वाले परिसीमन में मटियाला विधानसभा में आने वाले २ वार्डों – घुमन्हेड़ा और छावला, की सूरत बदल सकती है। वर्तमान में घुमन्हेड़ा वार्ड अनुसूचित जाती के लिए आरक्षित है, जबकि छावला एक जनरल वार्ड है।
घुमन्हेड़ा वार्ड में करीब 45,000 मतदाता हैं, जबकि छावला वार्ड में करीब 55,000 वोटर्स हैं। घुमन्हेड़ा वार्ड में करीब 23-24 गांव व कुछ कॉलोनियां हैं , वहीँ दूसरी तरफ छावला वार्ड में 3 गांव हैं व बाकी सारी कॉलोनियां हैं।
छावला वार्ड में पूर्वांचलियों की बहुतायत है। वर्तमान में छावला वार्ड से भाजपा के पवन शर्मा पार्षद हैं। पिछले चुनाव में शर्मा ने छावला गांव के ही आम आदमी पार्टी (आप) के सुमित शौकीन को करीब 1000 वोटों से हराया था।
इस बार पूर्वांचलियों की करीब 30,000 वोटों का प्रतिनिधत्व करने का दावा आप पार्टी के अमरनाथ यादव कर रहे हैं। यादव आप पार्टी के संगठन मंत्री हैं और छावला वार्ड के क़ुतुब विहार में रहते हैं।
वहीँ दूसरी तरफ, घुमन्हेड़ा वार्ड के वर्तमान पार्षद दीपक मेहरा हाल ही में आप पार्टी में शामिल हुए हैं। अगर छावला गांव घुमन्हेड़ा वार्ड में मिला दिया जाता है तो इस वार्ड का जनरल वार्ड होना तय माना जा रहा है। ऐसी सूरत में मेहरा का चुनावी गणित बिगड़ने की पूरी संभावना है।
दिल्ली के एक वरिश्ठ अधिकारी की माने तो छावला गांव को घुमन्हेड़ा वार्ड में मिलाने की तैयारी चल रही है। अगर छावला गांव को घुम्मनहेड़ा वार्ड में मिलाया जाता है तो दोनों वार्डों के मतदाताओं की संख्या बराबर हो जाती है।
चुनाव से पहले परिसीमन करने की कवायत जोरों पर है। दोनों वार्डों की सूरत बदलते ही कई नेताओं की किस्मत बदलनी तय है।

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