दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू होने से पता चला कि पहले सरकारी शराब की दुकानों पर कितना भ्रष्टाचार था !

दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू होने से पता चला कि पहले सरकारी शराब की दुकानों पर कितना भ्रष्टाचार था !

दिल्ली में नई आबकारी नीति लागू होने से पता चला कि पहले सरकारी शराब की दुकानों पर कितना भ्रष्टाचार था !

नई दिल्ली, ३ मई (दिल्ली क्राउन): दिल्ली में नई आबकारी नीति को लागू हुए छह महीने होने वाले हैं। दिल्ली के भाजपा इकाई के द्वारा केजरीवाल सरकार की इस नई नीति का पुरजोर विरोध भी देखा गया, जो कि पिछले कुछ हफ़्तों से फीका सा होता हुआ दिखाई पड़ता है।

जब से नई आबकारी नीति लागू हुई है तब से शराब की कीमतों में भारी गिरावट देखी गयी है।

जहाँ एक तरफ भाजपा की दिल्ली इकाई केजरीवाल की दिल्ली को एक “शराब की नगरी” बनाने की आलोचना कर रही है, वहीँ दूसरी तरफ यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले, जब शराब का धंधा सरकारी दुकानों के द्वारा किया जाता था, तब कितना भ्रष्टाचार होता था।

और, उस भ्रष्टाचार को ख़त्म करने के लिए अगर केजरीवाल सरकार ने यह कदम उठाया, तो ठीक उठाया।

जो शराब कि बोतल 17 नवंबर (जिस दिन नई आबकारी नीति लागू हुई थी) से पहले करीब 800-900 रूपए कि मिलती थी, वही बोतल अब 450-475 रूपए कि मिलती है।

आज दिल्ली से सटे हरियाणा में जो एक बीयर की बोतल 180 रूपए की मिलती है, वही बीयर की बोतल दिल्ली में 125 रूपए की उपलब्ध है। आखिर ये कमाल कैसे हुआ?

बता दें कि पहले सरकारी दुकानों पर मैनेजर की “कुर्सी” हथियाने के लिए 50-60 लाख रूपए तक की बोली लगा करती थी। यह रकम शराब की कंपनियों के सेल्स एक्सेक्यूटिवेस से कमीशन लेकर पूरी की जाती थी। पैसे कमाने के और भी तरीके थे। एक-दो एक्सपर्ट लड़के बोतल की सील को खींच कर निकालते थे और 2 बोतलों में पानी मिला कर 3 बोतलें  बना देता थे। कुछ बोतलें खाली कर उनको जानभूझ कर तोड़ कर व “ब्रेकेज” दिखाकर पैसे कमाए जाते थे।

इन सब भ्रष्टाचार वाली हरकतों की वजह से ही ग्राहक से ज्यादा पैसे वसूले जाते थे।

अब, 17 नवंबर से, यह गोरख धंधा बंद हो चुका है और प्राइवेट कर्मी अपनी पूरी निष्ठा से काम करते हुई दिखाई देते हैं।

वैसे भी आजकल निजीकरण का ही ज़माना है। सब कुछ निजी हाथों में जाता हुआ दिखाई देता है, तो शराब का धंधा क्यों नहीं?!

दिल्ली के अलावा शायद ही कोई राज्य होगा जहाँ शराब का धंधा सरकारी दुकानों के जरिये होता होगा। एक राज्य तो ऐसा भी है जहाँ वैसे तो शराब पीने और बेचने पर प्रतिबन्ध है, लेकिन होटल में चेक-इन करते ही होटल का मैनेजर “पीने वाले” को बता देता है कि शराब कहाँ से कैसे उपलब्ध की जा सकती है।

दिल्ली में 17 नवंबर से नई आबकारी नीति के लागू होने के बाद से ग्राहक खुश है क्यूंकि सस्ते दाम पर शराब उपलब्ध है, और सरकार भी खुश है क्यूंकि पहले से ज्यादा कर इक्कठा हो पा रहा है। परेशान दिखाई पड़ती है तो भाजपा की दिल्ली इकाई, जो पिछले छह महीनों से लगातार प्रदर्शन करती आ रही है!

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